उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई। कोटि भाँति कोउ करै उपाई।।
मूल पाठ
जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई। कोटि भाँति कोउ करै उपाई।।
तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई। रहि न सकइ हरि भगति बिहाई।।
स्रोत अभिलेख 7.119 · पुस्तक पृ. 1029, 1030
भावार्थ
मूल पाठ के बादजैसे स्थलके बिना जल नहीं रह सकता, चाहे कोई करोड़ों प्रकारके उपाय क्यों न करे। वैसे ही, हे पक्षिराज! सुनिये, मोक्षसुख भी श्रीहरिकी भक्तिको छोड़कर नहीं रह सकता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1030 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई। कोटि भाँति कोउ करै उपाई।।
English explanation
Just as water cannot remain without ground to support it, however many millions of methods one tries.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| थल | भूमि के आधार | supporting ground |
| बिनु | के बिना | without |
| जल | पानी | water |
| रहि | ठहर | remain |
| न | नहीं | not |
| सकाई | सकता | can |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| भाँति | प्रकार के | kinds of |
| कोउ | कोई भी | anyone |
| करै | करे | may try |
| उपाई | उपाय | methods |
2 तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई। रहि न सकइ हरि भगति बिहाई।।
English explanation
Likewise, listen, O Garuda, king of birds: the bliss of liberation cannot endure apart from devotion to Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तथा | उसी प्रकार | likewise |
| मोच्छ | मोक्ष का | of liberation |
| सुख | आनंद | bliss |
| सुनु | सुनो | listen |
| खगराई | हे पक्षीराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| रहि | टिक | endure |
| न | नहीं | not |
| सकइ | सकता | can |
| हरि | भगवान हरि की | to Lord Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बिहाई | छोड़कर | forsaking |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1030
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1029, 1030
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।