उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ग्यान पंथ कृपान कै धारा। परत खगेस होइ नहिं बारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दज्ञानका मार्ग कृपाण (दुधारी तलवार) की धारके समान है। हे पक्षिराज! इस मार्गसे गिरते देर नहीं लगती। जो इस मार्गको निर्विघ्न निबाह ले जाता है, वही कैवल्य (मोक्ष) रूप परमपदको प्राप्त करता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1029 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ग्यान पंथ कृपान कै धारा। परत खगेस होइ नहिं बारा।।
जो निर्बिघ्न पंथ निर्बहई। सो कैवल्य परम पद लहई।।
स्रोत अभिलेख 7.119 · पुस्तक पृ. 1029, 1030
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ग्यान पंथ कृपान कै धारा। परत खगेस होइ नहिं बारा।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: The path of knowledge is like a sword’s edge. O Garuda, king of birds, it takes no time to fall from it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यान | ज्ञान का | of spiritual knowledge |
| पंथ | मार्ग | path |
| कृपान | तलवार | sword |
| कै | की | of |
| धारा | धार | edge |
| परत | गिरने में | in falling |
| खगेस | हे पक्षीराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| होइ | होती है | there is |
| नहिं | नहीं | no |
| बारा | देर | delay |
2 जो निर्बिघ्न पंथ निर्बहई। सो कैवल्य परम पद लहई।।
English explanation
Whoever completes this path without hindrance attains the supreme state of liberation called kaivalya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| निर्बिघ्न | बिना विघ्न के | without hindrance |
| पंथ | मार्ग को | the path |
| निर्बहई | पूरा निभाता है | successfully follows to completion |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| कैवल्य | कैवल्यरूपी मुक्ति | liberation called kaivalya |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| पद | अवस्था | state |
| लहई | प्राप्त करता है | attains |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1029
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1029, 1030
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।