उत्तरकाण्ड · दोहा 118 (ख) · दोहा
कहत कठिन समुझत कठिन साधत कठिन बिबेक ।
कहत कठिन समुझत कठिन साधत कठिन बिबेक ।
होइ घुनाच्छर न्याय जौं पुनि प्रत्यूह अनेक॥ ११८ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.118 · पुस्तक पृ. 1028, 1029
भावार्थ और शब्दार्थ
1कहत कठिन समुझत कठिन साधत कठिन बिबेक ।
विवेक को कहना कठिन है, समझना कठिन है और साधना भी कठिन है।
English explanation
Discriminative wisdom is difficult to explain, difficult to understand, and difficult to cultivate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहना या समझाना | to explain |
| कठिन | कठिन है | is difficult |
| समुझत | समझना | to understand |
| कठिन | कठिन है | is difficult |
| साधत | साधना या अभ्यास से प्राप्त करना | to cultivate through practice |
| कठिन | कठिन है | is difficult |
| बिबेक | सत्य-असत्य का विवेक | discriminative wisdom |
2होइ घुनाच्छर न्याय जौं पुनि प्रत्यूह अनेक॥ ११८ (ख)॥
यदि घुन के संयोग से अक्षर बना देने की तरह विवेक प्राप्त हो भी जाए, तो भी अनेक बाधाएँ आती हैं।
English explanation
Even if such wisdom arises by chance, like letters accidentally formed by a woodworm, many obstacles still remain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइ | प्राप्त हो जाए | should arise |
| घुनाच्छर | घुन द्वारा संयोग से अक्षर-जैसी आकृति बनने का | of a woodworm accidentally making letter-like shapes |
| न्याय | दृष्टांत के अनुसार | according to the analogy |
| जौं | यदि | if |
| पुनि | तो भी | even then |
| प्रत्यूह | बाधाएँ | obstacles |
| अनेक | अनेक | many |
| ख | पद का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 118 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.118
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1028, 1029
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।