सुन्दरकाण्ड · छंद · छंद
चिक्करहिं दिग्गज डोल महि गिरि लोल सागर खरभरे।
मूल पाठ
चिक्करहिं दिग्गज डोल महि गिरि लोल सागर खरभरे।
मन हरष सभ गंधर्ब सुर मुनि नाग किन्नर दुख टरे।।
कटकटहिं मर्कट बिकट भट बहु कोटि कोटिन्ह धावहीं।
जय राम प्रबल प्रताप कोसलनाथ गुन गन गावहीं।।1।।
स्रोत अभिलेख 5.35 · पुस्तक पृ. 745, 746
भावार्थ
मूल पाठ के बाददिशाओंके हाथी चिग्घाडऩे लगे, पृथ्वी डोलने लगी, पर्वत चञ्चल हो गये (काँपने लगे) और समुद्र खलबला उठे। गन्धर्व, देवता, मुनि, नाग, किन्नर सब-के-सब मनमें हॢषत हुए कि [अब] हमारे दु:ख टल गये। अनेकों करोड़ भयानक वानर योद्धा कटकटा रहे हैं और करोड़ों ही दौड़ रहे हैं। 'प्रबलप्रताप कोसलनाथ श्रीरामचन्द्रजीकी जय हो ऐसा पुकारते हुए वे उनके गुणसमूहोंको गा रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 746 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1चिक्करहिं दिग्गज डोल महि गिरि लोल सागर खरभरे।
English explanation
The elephants of the directions trumpet, the earth shakes, mountains sway, and seas surge tumultuously.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिक्करहिं | चिंघाड़ते हैं | trumpet |
| दिग्गज | दिशाओं के रक्षक हाथी | elephants of the directions |
| डोल | डोलती है | shakes |
| महि | धरती | the earth |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| लोल | हिलते हुए | swaying |
| सागर | समुद्र | seas |
| खरभरे | उफन उठे | surged tumultuously |
2 मन हरष सभ गंधर्ब सुर मुनि नाग किन्नर दुख टरे।।
English explanation
All the celestial musicians, gods, sages, nagas, and kinnaras rejoiced in their hearts, and their sorrows passed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन में | in their hearts |
| हरष | आनंद हुआ | rejoiced |
| सभ | सभी | all |
| गंधर्ब | स्वर्गीय गायक गंधर्व | celestial musicians |
| सुर | देवता | gods |
| मुनि | मुनि | sages |
| नाग | नाग जाति के दिव्य प्राणी | divine serpent beings |
| किन्नर | किन्नर दिव्य गायक | kinnaras, celestial singers |
| दुख | दुख | sorrows |
| टरे | दूर हुए | passed away |
3 कटकटहिं मर्कट बिकट भट बहु कोटि कोटिन्ह धावहीं।
English explanation
The formidable monkey warriors gnash their teeth; they rush onward in countless millions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कटकटहिं | दाँत कटकटाते हैं | gnash their teeth |
| मर्कट | वानर | monkeys |
| बिकट | भयंकर | formidable |
| भट | योद्धा | warriors |
| बहु | बहुत | many |
| कोटि | करोड़ | tens of millions |
| कोटिन्ह | करोड़ों की संख्या में | in tens of millions |
| धावहीं | दौड़ते हैं | rush onward |
4 जय राम प्रबल प्रताप कोसलनाथ गुन गन गावहीं।।1।।
English explanation
They acclaim Rama, the lord of Kosala whose might is immense, and sing his many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | victory to |
| राम | राम | Rama |
| प्रबल | प्रचंड | mighty |
| प्रताप | प्रताप | majesty and prowess |
| कोसलनाथ | कोसल के स्वामी राम | Rama, lord of Kosala |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| गन | समूह | multitudes |
| गावहीं | गाते हैं | sing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 5.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 746
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका वानरोंकी सेनाके साथ चलकर समुद्रतटपर पहुँचना
- मुद्रित पृष्ठ
- 745, 746
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।