सुन्दरकाण्ड · छंद · छंद
सहि सक न भार उदार अहिपति बार बारहिं मोहई।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउदार (परम श्रेष्ठ एवं महान्) सर्पराज शेषजी भी सेनाका बोझ नहीं सह सकते, वे बार-बार मोहित हो जाते (घबड़ा जाते) हैं और पुन:-पुन: कच्छपकी कठोर पीठको दाँतोंसे पकड़ते हैं। ऐसा करते (अर्थात् बार-बार दाँतोंको गड़ाकर कच्छपकी पीठपर लकीर-सी खींचते हुए) वे कैसे शोभा दे रहे हैं मानो श्रीरामचन्द्रजीकी सुन्दर प्रस्थानयात्राको परम सुहावनी जानकर उसकी अचल पवित्र कथाको सर्पराज शेषजी कच्छपकी पीठपर लिख रहे हों॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 746 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सहि सक न भार उदार अहिपति बार बारहिं मोहई।
गह दसन पुनि पुनि कमठ पृष्ट कठोर सो किमि सोहई।।
रघुबीर रुचिर प्रयान प्रस्थिति जानि परम सुहावनी।
जनु कमठ खर्पर सर्पराज सो लिखत अबिचल पावनी।।2।।
स्रोत अभिलेख 5.35 · पुस्तक पृ. 745, 746
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सहि सक न भार उदार अहिपति बार बारहिं मोहई।
English explanation
Shesha, lord of serpents, cannot bear the immense weight and repeatedly swoons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहि | सह | bear |
| सक | सकते | can |
| न | नहीं | not |
| भार | भार | the weight |
| उदार | विशाल | immense |
| अहिपति | सर्पों के स्वामी शेष | Shesha, lord of serpents |
| बार | बार | time |
| बारहिं | बार ही | after time |
| मोहई | मूर्छित होते हैं | swoon |
2 गह दसन पुनि पुनि कमठ पृष्ट कठोर सो किमि सोहई।।
English explanation
Again and again he grips the tortoise’s hard back with his teeth; how striking that sight is!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गह | पकड़ते हैं | grips |
| दसन | दाँतों से | with his teeth |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | and again |
| कमठ | कच्छप की | the tortoise’s |
| पृष्ट | पीठ | back |
| कठोर | कठोर | hard |
| सो | वह दृश्य | that sight |
| किमि | कैसा | how |
| सोहई | शोभता है | looks splendid |
3 रघुबीर रुचिर प्रयान प्रस्थिति जानि परम सुहावनी।
English explanation
Recognizing the commencement of Rama’s lovely march as supremely delightful—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम की | of Rama, hero of Raghu’s line |
| रुचिर | सुंदर | lovely |
| प्रयान | यात्रा | march |
| प्रस्थिति | प्रस्थान की घटना | the commencement |
| जानि | जानकर | recognizing as |
| परम | अत्यंत | supremely |
| सुहावनी | मनोहर | delightful |
4 जनु कमठ खर्पर सर्पराज सो लिखत अबिचल पावनी।।2।।
English explanation
It is as though the serpent king were inscribing an enduring record of that sacred departure on the tortoise’s shell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| कमठ | कच्छप के | the tortoise’s |
| खर्पर | कवच पर | on the shell |
| सर्पराज | सर्पों के राजा शेष | Shesha, king of serpents |
| सो | उस प्रस्थान को | that departure |
| लिखत | लिख रहे हैं | is inscribing |
| अबिचल | अमिट रूप से | indelibly |
| पावनी | पवित्र करने वाली | purifying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 5.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 746
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका वानरोंकी सेनाके साथ चलकर समुद्रतटपर पहुँचना
- मुद्रित पृष्ठ
- 745, 746
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।