सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नख आयुध गिरि पादपधारी। चले गगन महि इच्छाचारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनख ही जिनके शस्त्र हैं, वे इच्छानुसार (सर्वत्र बेरोक-टोक) चलनेवाले रीछ-वानर पर्वतों और वृक्षोंको धारण किये कोई आकाशमार्गसे और कोई पृथ्वीपर चले जा रहे हैं। वे सिंहके समान गर्जना कर रहे हैं। [उनके चलने और गर्जनेसे] दिशाओंके हाथी विचलित होकर चिग्घाड़ रहे हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 746 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नख आयुध गिरि पादपधारी। चले गगन महि इच्छाचारी।।
केहरिनाद भालु कपि करहीं। डगमगाहिं दिग्गज चिक्करहीं।।
स्रोत अभिलेख 5.35 · पुस्तक पृ. 745, 746
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नख आयुध गिरि पादपधारी। चले गगन महि इच्छाचारी।।
English explanation
With claws as weapons and carrying mountains and trees, they moved at will through the sky and over the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नख | नख | claws |
| आयुध | हथियार | weapons |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| पादपधारी | वृक्ष धारण करने वाले | carrying trees |
| चले | चले | moved |
| गगन | आकाश में | through the sky |
| महि | धरती पर | over the earth |
| इच्छाचारी | इच्छानुसार चलने वाले | moving at will |
2 केहरिनाद भालु कपि करहीं। डगमगाहिं दिग्गज चिक्करहीं।।
English explanation
The bears and monkeys roar like lions; the elephants guarding the directions stagger and trumpet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहरिनाद | सिंह जैसी गर्जना | a lion-like roar |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| करहीं | करते हैं | make |
| डगमगाहिं | डगमगाते हैं | stagger |
| दिग्गज | दिशाओं के रक्षक हाथी | elephants guarding the directions |
| चिक्करहीं | चिंघाड़ते हैं | trumpet |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 746
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका वानरोंकी सेनाके साथ चलकर समुद्रतटपर पहुँचना
- मुद्रित पृष्ठ
- 745, 746
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।