सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोइ जोइ सगुन जानकिहि होई। असगुन भयउ रावनहि सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजानकीजीको जो-जो शकुन होते थे, वही-वही रावणके लिये अपशकुन हुए। सेना चली, उसका वर्णन कौन कर सकता है? असंख्य वानर और भालू गर्जना कर रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 745 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जोइ जोइ सगुन जानकिहि होई। असगुन भयउ रावनहि सोई।।
चला कटकु को बरनैं पारा। गर्जहि बानर भालु अपारा।।
स्रोत अभिलेख 5.35 · पुस्तक पृ. 745, 746
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जोइ जोइ सगुन जानकिहि होई। असगुन भयउ रावनहि सोई।।
English explanation
Whatever signs were auspicious for Janaki were inauspicious for Ravana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोइ | जो | whatever |
| जोइ | जो भी | each such |
| सगुन | शुभ शकुन | auspicious signs |
| जानकिहि | जनक की पुत्री सीता के लिए | for Sita, Janaka’s daughter |
| होई | हुए | occurred |
| असगुन | अशुभ शकुन | inauspicious signs |
| भयउ | हुआ | became |
| रावनहि | रावण के लिए | for Ravana |
| सोई | वही | that same |
2 चला कटकु को बरनैं पारा। गर्जहि बानर भालु अपारा।।
English explanation
The army set out—who could describe it? Countless monkeys and bears roar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चला | चल पड़ा | set out |
| कटकु | सैन्यदल | the army |
| को | कौन | who |
| बरनैं | वर्णन करने में | to describe |
| पारा | समर्थ हो सकता है | could be able |
| गर्जहि | गरजते हैं | roar |
| बानर | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| अपारा | असंख्य | countless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 745
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका वानरोंकी सेनाके साथ चलकर समुद्रतटपर पहुँचना
- मुद्रित पृष्ठ
- 745, 746
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।