किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 27 · दोहा/सोरठा
मोहि लै जाहु सिंधुतट देउँ तिलांजलि ताहि ।
मोहि लै जाहु सिंधुतट देउँ तिलांजलि ताहि ।
बचन सहाइ करवि मैं पैहहु खोजहु जाहि ।।27।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.27 · पुस्तक पृ. 707, 708
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोहि लै जाहु सिंधुतट देउँ तिलांजलि ताहि ।
मुझे समुद्र के तट पर ले चलो, ताकि मैं जटायु को तिलांजलि दे सकूँ।
English explanation
Take me to the seashore so that I may offer water and sesame in tribute to Jatayu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | me |
| लै | लेकर | taking |
| जाहु | जाओ; ले चलो | go; take along |
| सिंधुतट | समुद्र के तट पर | to the seashore |
| देउँ | मैं दूँ | I may offer |
| तिलांजलि | मृतक के लिए तिल और जल की अंजलि | an offering of sesame and water for the deceased |
| ताहि | उसे; जटायु को | to him; to Jatayu |
2 बचन सहाइ करवि मैं पैहहु खोजहु जाहि ।।27।।
मैं अपनी बातों से सहायता करूँगा; जिसे तुम खोज रहे हो, उसे पाओगे। (‘करवि’ का पाठ संदिग्ध है।)
English explanation
I shall help through my words; you will find the one you are seeking. (The reading ‘करवि’ is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन से; जानकारी देकर | through words; by giving information |
| सहाइ | सहायता | help |
| करवि | संभवतः करूँगा | probably, I shall give |
| मैं | मैं | I |
| पैहहु | तुम पाओगे | you will find |
| खोजहु | तुम खोज रहे हो | you are seeking |
| जाहि | जिसे | whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 27
- स्रोत अभिलेख
- 4.27
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 707, 708
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।