किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 17 · दोहा/सोरठा
भूमि जीव संकुल रहे गए सरद रितु पाइ।
भूमि जीव संकुल रहे गए सरद रितु पाइ।
सदगुर मिले जाहिं जिमि संसय भ्रम समुदाइ।।17।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.17 · पुस्तक पृ. 698, 699
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भूमि जीव संकुल रहे गए सरद रितु पाइ।
जिन जीवों से भूमि भरी हुई थी, वे शरद ऋतु आने पर चले गए।
English explanation
The creatures that had crowded the earth disappeared when autumn arrived.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूमि | भूमि | the earth |
| जीव | जीवों से | with creatures |
| संकुल | भरी हुई | crowded |
| रहे | थी, पहले विद्यमान थे | had been |
| गए | चले गए | disappeared |
| सरद | शरद | autumn |
| रितु | ऋतु | season |
| पाइ | आने पर | upon its arrival |
2 सदगुर मिले जाहिं जिमि संसय भ्रम समुदाइ।।17।।
जैसे सच्चे गुरु के मिलने पर संशयों और भ्रमों के समूह दूर हो जाते हैं।
English explanation
Just as hosts of doubts and delusions depart upon meeting a true spiritual teacher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदगुर | सच्चे आध्यात्मिक गुरु के | a true spiritual teacher |
| मिले | मिलने पर | upon meeting |
| जाहिं | चले जाते हैं | depart |
| जिमि | जैसे | just as |
| संसय | संशयों के | of doubts |
| भ्रम | भ्रमों के | of delusions |
| समुदाइ | समूह | hosts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 17
- स्रोत अभिलेख
- 4.17
- सहायक विषय
- शरद्-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 698, 699
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।