किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 18 · दोहा/सोरठा
तब अनुजहि समुझावा रघुपति करुना सींव।।
तब अनुजहि समुझावा रघुपति करुना सींव।।
भय देखाइ लै आवहु तात सखा सुग्रीव।।18।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.18 · पुस्तक पृ. 699, 700
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तब अनुजहि समुझावा रघुपति करुना सींव।।
तब करुणा की पराकाष्ठा राम ने अपने छोटे भाई को समझाया।
English explanation
Then Rama, the very limit of compassion, counselled his younger brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| अनुजहि | छोटे भाई लक्ष्मण को | his younger brother Lakshmana |
| समुझावा | समझाया | counselled |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu's lineage |
| करुना | करुणा की | of compassion |
| सींव | सीमा, पराकाष्ठा | limit, utmost extent |
2 भय देखाइ लै आवहु तात सखा सुग्रीव।।18।।
हे तात, मित्र सुग्रीव को भय दिखाकर ले आओ।
English explanation
Dear brother, frighten our friend Sugriva and bring him here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भय | भय | fear |
| देखाइ | दिखाकर | having shown; instilling |
| लै | लेकर | taking along |
| आवहु | आओ | come; bring him here |
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
| सखा | मित्र | friend |
| सुग्रीव | सुग्रीव को, वानरराज को | Sugriva, the monkey king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 18
- स्रोत अभिलेख
- 4.18
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 699, 700
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