किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 19 · दोहा/सोरठा
धनुष चढ़ाइ कहा तब जारि करउँ पुर छार।
धनुष चढ़ाइ कहा तब जारि करउँ पुर छार।
ब्याकुल नगर देखि तब आयउ बालिकुमार।।19।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.19 · पुस्तक पृ. 700, 700
भावार्थ और शब्दार्थ
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1धनुष चढ़ाइ कहा तब जारि करउँ पुर छार।
तब लक्ष्मण ने धनुष चढ़ाकर कहा, ‘मैं नगर को जलाकर राख कर दूँगा।’
English explanation
Then Lakshmana readied his bow and said, ‘I will burn the city to ashes.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धनुष | धनुष | bow |
| चढ़ाइ | चढ़ाकर; तैयार करके | having readied it |
| कहा | कहा | said |
| तब | तब | then |
| जारि | जलाकर | by burning |
| करउँ | मैं कर दूँ | I will turn |
| पुर | नगर को | the city |
| छार | राख | ashes |
2 ब्याकुल नगर देखि तब आयउ बालिकुमार।।19।।
तब नगर को व्याकुल देखकर बाली के पुत्र अंगद आए।
English explanation
Then, seeing the city in distress, Angada, Bali’s son, came.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याकुल | व्याकुल; भय से व्यथित | distressed; alarmed |
| नगर | नगर को | the city |
| देखि | देखकर | seeing |
| तब | तब | then |
| आयउ | आया | came |
| बालिकुमार | बाली का पुत्र अंगद | Angada, son of Bali |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 19
- स्रोत अभिलेख
- 4.19
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 700, 700
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