किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 20 · दोहा/सोरठा
हरषि चले सुग्रीव तब अंगदादि कपि साथ।
हरषि चले सुग्रीव तब अंगदादि कपि साथ।
रामानुज आगें करि आए जहँ रघुनाथ।।20।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.2 · पुस्तक पृ. 701, 701
भावार्थ और शब्दार्थ
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1हरषि चले सुग्रीव तब अंगदादि कपि साथ।
तब सुग्रीव प्रसन्न होकर अंगद आदि वानरों के साथ चले।
English explanation
Then Sugriva set out joyfully with Angada and the other monkeys.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चले | चल पड़े | set out |
| सुग्रीव | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, king of the monkeys |
| तब | तब | then |
| अंगदादि | अंगद आदि | Angada and others |
| कपि | वानरों के | monkeys |
| साथ | साथ | with |
2 रामानुज आगें करि आए जहँ रघुनाथ।।20।।
राम के छोटे भाई लक्ष्मण को आगे करके वे वहाँ आए जहाँ रघुनाथ राम थे।
English explanation
With Lakshmana, Rama’s younger brother, leading the way, they came to where Rama was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामानुज | राम के छोटे भाई लक्ष्मण को | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| आगें | आगे | in front |
| करि | करके | placing |
| आए | आए | came |
| जहँ | जहाँ | where |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 20
- स्रोत अभिलेख
- 4.2
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 701
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