किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 25 · दोहा/सोरठा
बदरीबन कहुँ सो गई प्रभु अग्या धरि सीस ।
बदरीबन कहुँ सो गई प्रभु अग्या धरि सीस ।
उर धरि राम चरन जुग जे बंदत अज ईस।।25।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.25 · पुस्तक पृ. 705, 706
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बदरीबन कहुँ सो गई प्रभु अग्या धरि सीस ।
प्रभु की आज्ञा सिर पर धारण करके स्वयंप्रभा बदरीवन को गईं।
English explanation
Reverently accepting the Lord’s command, Svayamprabha went to the forest of Badari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बदरीबन | बदरीवन, बदरी का पवित्र वन | the sacred forest of Badari |
| कहुँ | को; की ओर | to; toward |
| सो | वह, स्वयंप्रभा | she, Svayamprabha |
| गई | गईं | went |
| प्रभु | प्रभु राम की | Lord Rama’s |
| अग्या | आज्ञा | command |
| धरि | धारण करके | having placed |
| सीस | सिर पर | upon her head |
2 उर धरि राम चरन जुग जे बंदत अज ईस।।25।।
उन्होंने राम के दोनों चरण हृदय में धारण किए, जिनकी वंदना ब्रह्मा और शिव करते हैं।
English explanation
She enshrined in her heart Rama’s two feet, which Brahma and Shiva venerate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | हृदय में | in her heart |
| धरि | धारण करके | enshrining |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरण | feet |
| जुग | दोनों; जोड़ा | the pair; both |
| जे | जिनकी | which |
| बंदत | वंदना करते हैं | venerate |
| अज | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| ईस | शिव | Shiva |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 25
- स्रोत अभिलेख
- 4.25
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 705, 706
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।