किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 24 · दोहा/सोरठा
दीख जाइ उपवन बर सर बिगसित बहु कंज।
दीख जाइ उपवन बर सर बिगसित बहु कंज।
मंदिर एक रुचिर तहँ बैठि नारि तप पुंज।।24।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.24 · पुस्तक पृ. 704, 705
भावार्थ और शब्दार्थ
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1दीख जाइ उपवन बर सर बिगसित बहु कंज।
अंदर जाकर उन्हें एक उपवन और सुंदर सरोवर दिखाई दिया, जिसमें अनेक कमल खिले थे।
English explanation
Going inside, they saw a grove and a beautiful lake with many lotuses in bloom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीख | दिखाई दिया | came into view |
| जाइ | जाकर | having gone |
| उपवन | उपवन | a grove |
| बर | सुंदर | beautiful |
| सर | सरोवर | lake |
| बिगसित | खिले हुए | in bloom |
| बहु | अनेक | many |
| कंज | कमल | lotuses |
2 मंदिर एक रुचिर तहँ बैठि नारि तप पुंज।।24।।
वहाँ एक सुंदर भवन था, जिसमें तपस्या की मूर्ति-सी एक स्त्री बैठी थी।
English explanation
There was a lovely building there, where a woman embodying great ascetic discipline sat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदिर | भवन | building |
| एक | एक | a |
| रुचिर | सुंदर | lovely |
| तहँ | वहाँ | there |
| बैठि | बैठी थी | was seated |
| नारि | स्त्री | a woman |
| तप | तपस्या | ascetic discipline |
| पुंज | की मूर्तिमान राशि | an embodiment of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 24
- स्रोत अभिलेख
- 4.24
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान · गुफामें तपस्विनीके दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 704, 705
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।