किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 23 · दोहा/सोरठा
चले सकल बन खोजत सरिता सर गिरि खोह।
चले सकल बन खोजत सरिता सर गिरि खोह।
राम काज लयलीन मन बिसरा तन कर छोह।।23।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.23 · पुस्तक पृ. 703, 704
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1चले सकल बन खोजत सरिता सर गिरि खोह।
वे सभी वन, नदियाँ, सरोवर, पहाड़ और गुफाएँ खोजते हुए चले।
English explanation
They all went on, searching forests, rivers, lakes, mountains, and caves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | वे चले | they went on |
| सकल | सभी | all of them |
| बन | वन | forests |
| खोजत | खोजते हुए | searching |
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| सर | सरोवर | lakes |
| गिरि | पहाड़ | mountains |
| खोह | गुफाएँ; कंदराएँ | caves |
2 राम काज लयलीन मन बिसरा तन कर छोह।।23।।
उनके मन राम के कार्य में पूरी तरह तल्लीन थे; उन्हें अपने शरीर का मोह भी भूल गया।
English explanation
Their minds were wholly absorbed in Rama’s task; they forgot even their attachment to their own bodies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| काज | कार्य में | in the task |
| लयलीन | पूरी तरह तल्लीन | wholly absorbed |
| मन | मन | their minds |
| बिसरा | भूल गया | was forgotten |
| तन | शरीर | the body |
| कर | का | for; of |
| छोह | मोह; ममता | attachment; fond concern |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 23
- स्रोत अभिलेख
- 4.23
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 703, 704
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