किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 22 · दोहा/सोरठा
बचन सुनत सब बानर जहँ तहँ चले तुरंत ।
बचन सुनत सब बानर जहँ तहँ चले तुरंत ।
तब सुग्रीवँ बोलाए अंगद नल हनुमंत।।22।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.22 · पुस्तक पृ. 702, 703
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बचन सुनत सब बानर जहँ तहँ चले तुरंत ।
ये वचन सुनते ही सभी वानर तुरंत अलग-अलग दिशाओं में चल पड़े।
English explanation
On hearing these words, all the monkeys immediately set off in different directions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन | these words |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| सब | सभी | all |
| बानर | वानर | the monkeys |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; अलग-अलग दिशाओं में | there; in various directions |
| चले | चल पड़े | set off |
| तुरंत | तुरंत | immediately |
2 तब सुग्रीवँ बोलाए अंगद नल हनुमंत।।22।।
तब सुग्रीव ने अंगद, नल और हनुमान को बुलाया।
English explanation
Then Sugriva summoned Angada, Nala, and Hanuman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सुग्रीवँ | सुग्रीव ने | Sugriva |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| अंगद | वालि के पुत्र अंगद को | Angada, Vali’s son |
| नल | वानर नल को | Nala, a monkey warrior |
| हनुमंत | हनुमान को | Hanuman |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 22
- स्रोत अभिलेख
- 4.22
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 702, 703
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।