किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 12 · दोहा/सोरठा
प्रथमहिं देवन्ह गिरि गुहा राखेउ रुचिर बनाइ।
प्रथमहिं देवन्ह गिरि गुहा राखेउ रुचिर बनाइ।
राम कृपानिधि कछु दिन बास करहिंगे आइ।।12।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.12 · पुस्तक पृ. 694, 694
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रथमहिं देवन्ह गिरि गुहा राखेउ रुचिर बनाइ।
देवताओं ने पहले ही पर्वत की गुफा सुंदर बनाकर तैयार रखी थी।
English explanation
The gods had already made the mountain cave beautiful and kept it ready.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथमहिं | पहले ही | already beforehand |
| देवन्ह | देवताओं ने | the gods |
| गिरि | पर्वत की | of the mountain |
| गुहा | गुफा | cave |
| राखेउ | रख छोड़ी थी | had kept ready |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| बनाइ | बनाकर | having made |
2 राम कृपानिधि कछु दिन बास करहिंगे आइ।।12।।
इसलिए कि कृपा के भंडार राम आकर कुछ दिन वहाँ निवास करेंगे।
English explanation
For Rama, the treasure of compassion, would come and dwell there for a few days.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार | treasure of compassion |
| कछु | कुछ | a few |
| दिन | दिन | days |
| बास | निवास | residence |
| करहिंगे | करेंगे | will undertake |
| आइ | आकर | having come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 12
- स्रोत अभिलेख
- 4.12
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 694, 694
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।