किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 13 · दोहा/सोरठा
लछिमन देखु मोर गन नाचत बारिद पैखि।
लछिमन देखु मोर गन नाचत बारिद पैखि।
गृही बिरति रत हरष जस बिष्नु भगत कहुँ देखि।।13।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.13 · पुस्तक पृ. 695, 695
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 लछिमन देखु मोर गन नाचत बारिद पैखि।
हे लक्ष्मण, देखो—बादलों को देखकर मोरों के समूह नाच रहे हैं।
English explanation
Lakshmana, look: flocks of peacocks dance at the sight of clouds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | हे लक्ष्मण | O Lakshmana |
| देखु | देखो | look |
| मोर | मोरों के | of peacocks |
| गन | समूह | flocks |
| नाचत | नाच रहे हैं | are dancing |
| बारिद | बादलों को | clouds |
| पैखि | देखकर | having seen |
2 गृही बिरति रत हरष जस बिष्नु भगत कहुँ देखि।।13।।
जैसे वैराग्य में रत गृहस्थ विष्णु के भक्त को देखकर हर्षित होता है, वैसे ही मोर बादलों को देखकर आनंदित होते हैं।
English explanation
They rejoice like a householder devoted to detachment who is delighted to see a devotee of Vishnu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गृही | गृहस्थ | householder |
| बिरति | वैराग्य में | in detachment |
| रत | रत | devoted |
| हरष | हर्षित होता है | rejoices |
| जस | जैसे | just as |
| बिष्नु | भगवान विष्णु के | of Lord Vishnu |
| भगत | भक्त | devotee |
| कहुँ | को | object marker |
| देखि | देखकर | on seeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 13
- स्रोत अभिलेख
- 4.13
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 695, 695
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