किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 11 · दोहा/सोरठा
लछिमन तुरत बोलाए पुरजन बिप्र समाज।
लछिमन तुरत बोलाए पुरजन बिप्र समाज।
राजु दीन्ह सुग्रीव कहँ अंगद कहँ जुबराज।।11।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.11 · पुस्तक पृ. 693, 694
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लछिमन तुरत बोलाए पुरजन बिप्र समाज।
लक्ष्मण ने तुरंत नगरवासियों और ब्राह्मणों के समुदाय को बुलाया।
English explanation
Lakshmana immediately summoned the townspeople and the assembly of Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| पुरजन | नगरवासियों को | the townspeople |
| बिप्र | ब्राह्मणों का | of Brahmins |
| समाज | समुदाय | assembly |
2 राजु दीन्ह सुग्रीव कहँ अंगद कहँ जुबराज।।11।।
लक्ष्मण ने सुग्रीव को राज्य दिया और अंगद को युवराज बनाया।
English explanation
Lakshmana granted Sugriva the kingship and made Angada crown prince.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजु | राज्य | kingship |
| दीन्ह | दिया | granted |
| सुग्रीव | सुग्रीव | Sugriva |
| कहँ | को | to |
| अंगद | बालि के पुत्र अंगद | Angada, Bali’s son |
| कहँ | को | to |
| जुबराज | युवराज का पद | the crown-princeship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 11
- स्रोत अभिलेख
- 4.11
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 693, 694
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