किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 1 · दोहा/सोरठा
जग कारन तारन भव भंजन धरनी भार।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअथवा आप जगत्के मूल कारण और सम्पूर्ण लोकोंके स्वामी स्वयं भगवान् हैं, जिन्होंने लोगोंको भवसागरसे पार उतारने तथा पृथ्वीका भार नष्ट करनेके लिये मनुष्य-रूपमें अवतार लिया है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 683 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जग कारन तारन भव भंजन धरनी भार।
की तुम्ह अकिल भुवन पति लीन्ह मनुज अवतार।।1।।
स्रोत अभिलेख 4.1 · पुस्तक पृ. 682, 683
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1जग कारन तारन भव भंजन धरनी भार।
English explanation
“The cause of the world, deliverer from worldly existence, and remover of the earth’s burden—”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | जगत के | of the world |
| कारन | कारण; मूल स्रोत | cause; origin |
| तारन | पार उतारने वाले | deliverer across |
| भव | संसार; जन्म-मरण का चक्र | worldly existence; cycle of birth and death |
| भंजन | नष्ट करने वाले | remover of |
| धरनी | पृथ्वी का | of the earth |
| भार | भार | burden |
2 की तुम्ह अकिल भुवन पति लीन्ह मनुज अवतार।।1।।
English explanation
“Are you the lord of all worlds, who has taken human incarnation?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| की | क्या | are; is it that |
| तुम्ह | तुम | you |
| अकिल | समस्त | all |
| भुवन | लोकों के | of worlds |
| पति | स्वामी | lord |
| लीन्ह | लिया है | have taken |
| मनुज | मनुष्य का | human |
| अवतार | अवतार | incarnation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 1
- स्रोत अभिलेख
- 4.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 683
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 682, 683
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।