किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हम सब सेवक अति बड़भागी। संतत सगुन ब्रह्म अनुरागी।।
मूल पाठ
हम सब सेवक अति बड़भागी। संतत सगुन ब्रह्म अनुरागी।।
स्रोत अभिलेख 4.26 · पुस्तक पृ. 706, 707
भावार्थ
मूल पाठ के बादहम सब सेवक अत्यन्त बड़भागी हैं, जो निरन्तर सगुण ब्रह्म (श्रीरामजी) में प्रीति रखते हैं॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 707 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1हम सब सेवक अति बड़भागी। संतत सगुन ब्रह्म अनुरागी।।
English explanation
We servants are all exceedingly fortunate, ever devoted to Brahman manifest with attributes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हम | हम | we |
| सब | सभी | all |
| सेवक | सेवक | servants |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बड़भागी | बहुत भाग्यवान | greatly fortunate |
| संतत | सदा | always |
| सगुन | गुणों सहित प्रकट | manifest with attributes |
| ब्रह्म | ब्रह्म; परम सत्य | Brahman; ultimate reality |
| अनुरागी | प्रेम करने वाले | lovingly devoted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 707
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 706, 707
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।