किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जामवंत अंगद दुख देखी। कहिं कथा उपदेस बिसेषी।।
मूल पाठ
जामवंत अंगद दुख देखी। कहिं कथा उपदेस बिसेषी।।
तात राम कहुँ नर जनि मानहु। निर्गुन ब्रम्ह अजित अज जानहु।।
स्रोत अभिलेख 4.26 · पुस्तक पृ. 706, 707
भावार्थ
मूल पाठ के बादजाम्बवान्ने अंगदका दु:ख देखकर विशेष उपदेशकी कथाएँ कहीं। [वे बोले—] हे तात! श्रीरामजीको मनुष्य न मानो, उन्हें निर्गुण ब्रह्म, अजेय और अजन्मा समझो॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 707 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जामवंत अंगद दुख देखी। कहिं कथा उपदेस बिसेषी।।
English explanation
Seeing Angada’s distress, Jambavan tells a story offering particular instruction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जामवंत | जामवंत, वृद्ध रीछ-वीर | Jambavan, the elder bear warrior |
| अंगद | अंगद का | Angada’s |
| दुख | दुःख | distress |
| देखी | देखकर | having seen |
| कहिं | कहते हैं | tells |
| कथा | कथा | story; account |
| उपदेस | उपदेश | instruction |
| बिसेषी | विशेष | particular; significant |
2 तात राम कहुँ नर जनि मानहु। निर्गुन ब्रम्ह अजित अज जानहु।।
English explanation
Dear son, do not regard Rama as a mere human; know him as Brahman beyond attributes, unconquerable and unborn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे पुत्र; प्रिय बालक | dear son |
| राम | राम | Rama |
| कहुँ | को | object marker for Rama |
| नर | मनुष्य | a human being |
| जनि | मत | do not |
| मानहु | मानो | regard |
| निर्गुन | गुणों से परे | beyond attributes |
| ब्रम्ह | ब्रह्म; परम सत्य | Brahman; ultimate reality |
| अजित | अजेय | unconquerable |
| अज | अजन्मा | unborn |
| जानहु | जानो | know |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 707
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 706, 707
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।