किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ गुनग्य सोई बड़भागी । जो रघुबीर चरन अनुरागी।।
मूल पाठ
सोइ गुनग्य सोई बड़भागी । जो रघुबीर चरन अनुरागी।।
आयसु मागि चरन सिरु नाई। चले हरषि सुमिरत रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 4.23 · पुस्तक पृ. 703, 704
भावार्थ
मूल पाठ के बादसद्गुणोंको पहचाननेवाला (गुणवान्) तथा बड़भागी वही है जो श्रीरघुनाथजीके चरणोंका प्रेमी है। आज्ञा माँगकर और चरणोंमें फिर सिर नवाकर श्रीरघुनाथजीका स्मरण करते हुए सब हॢषत होकर चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 704 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोइ गुनग्य सोई बड़भागी । जो रघुबीर चरन अनुरागी।।
English explanation
Only one who loves Raghubira’s feet truly appreciates virtue and is greatly fortunate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very person |
| गुनग्य | गुणों का ज्ञाता; गुण पहचानने वाला | one who recognizes virtue |
| सोई | वही | that same person |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यशाली | greatly fortunate |
| जो | जो | who |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम के | of Rama, hero of Raghu’s line |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाला | lovingly devoted |
2 आयसु मागि चरन सिरु नाई। चले हरषि सुमिरत रघुराई।।
English explanation
Having asked permission and bowed their heads at his feet, they departed joyfully, remembering Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा; जाने की अनुमति | permission to depart |
| मागि | माँगकर | having asked for |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | their heads |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
| चले | वे चले | they departed |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | remembering |
| रघुराई | रघुवंश के स्वामी राम को | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 704
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 703, 704
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।