किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पाछें पवन तनय सिरु नावा। जानि काज प्रभु निकट बोलावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबके पीछे पवनसुत श्रीहनुमान्जीने सिर नवाया। कार्यका विचार करके प्रभुने उन्हें अपने पास बुलाया। उन्होंने अपने कर-कमलसे उनके सिरका स्पर्श किया तथा अपना सेवक जानकर उन्हें अपने हाथकी अँगूठी उतारकर दी॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 704 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पाछें पवन तनय सिरु नावा। जानि काज प्रभु निकट बोलावा।।
परसा सीस सरोरुह पानी। करमुद्रिका दीन्हि जन जानी।।
स्रोत अभिलेख 4.23 · पुस्तक पृ. 703, 704
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पाछें पवन तनय सिरु नावा। जानि काज प्रभु निकट बोलावा।।
English explanation
Afterward, Hanuman, the wind god’s son, bowed his head. Knowing the task, the Lord called him near.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाछें | इसके बाद; अंत में | afterward; last |
| पवन | पवनदेव के | of the wind god |
| तनय | पुत्र हनुमान ने | the son, Hanuman |
| सिरु | सिर | his head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| जानि | जानकर; समझकर | knowing; understanding |
| काज | कार्य | the task |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| निकट | अपने पास | near himself |
| बोलावा | बुलाया | called him |
2 परसा सीस सरोरुह पानी। करमुद्रिका दीन्हि जन जानी।।
English explanation
Rama touched Hanuman’s head with his lotus-like hand and, recognizing him as his servant, gave him his ring.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परसा | स्पर्श किया | touched |
| सीस | सिर | the head |
| सरोरुह | कमल-समान | lotus-like |
| पानी | हाथ से | with his hand |
| करमुद्रिका | हाथ की अँगूठी | his finger ring |
| दीन्हि | दी | gave |
| जन | अपना सेवक; भक्त | his servant; devotee |
| जानी | जानकर | recognizing him as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 704
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 703, 704
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।