किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु प्रकार सीतहि समुझाएहु। कहि बल बिरह बेगि तुम्ह आएहु।।
मूल पाठ
बहु प्रकार सीतहि समुझाएहु। कहि बल बिरह बेगि तुम्ह आएहु।।
हनुमत जन्म सुफल करि माना। चलेउ हृदयँ धरि कृपानिधाना।।
स्रोत अभिलेख 4.23 · पुस्तक पृ. 703, 704
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[और कहा—] बहुत प्रकारसे सीताको समझाना और मेरा बल तथा विरह (प्रेम) कहकर तुम शीघ्र लौट आना। हनुमान्जीने अपना जन्म सफल समझा और कृपानिधान प्रभुको हृदयमें धारण करके वे चले॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 704 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहु प्रकार सीतहि समुझाएहु। कहि बल बिरह बेगि तुम्ह आएहु।।
English explanation
Reassure Sita in many ways; tell her of my strength and my anguish of separation, then return quickly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार से | in ways |
| सीतहि | सीता को | to Sita |
| समुझाएहु | समझाना; धीरज देना | explain; reassure |
| कहि | बताकर | having told |
| बल | मेरा बल; सामर्थ्य | my strength |
| बिरह | मेरा वियोग-दुःख | my anguish of separation |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| तुम्ह | तुम | you |
| आएहु | लौट आना | return |
2 हनुमत जन्म सुफल करि माना। चलेउ हृदयँ धरि कृपानिधाना।।
English explanation
Hanuman considered his birth fulfilled and departed, holding Rama, the treasure of compassion, in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हनुमत | हनुमान ने | Hanuman |
| जन्म | अपना जन्म | his birth |
| सुफल | सफल; सार्थक | fruitful; fulfilled |
| करि | करके; मानकर | as; having regarded as |
| माना | माना | considered |
| चलेउ | चल पड़े | departed |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| धरि | धारण करके | holding |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार राम को | Rama, the treasure of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 704
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 703, 704
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।