किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि प्रभु जानत सब बाता। राजनीति राखत सुरत्राता।।
मूल पाठ
जद्यपि प्रभु जानत सब बाता। राजनीति राखत सुरत्राता।।
स्रोत अभिलेख 4.23 · पुस्तक पृ. 703, 704
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि देवताओंकी रक्षा करनेवाले प्रभु सब बात जानते हैं, तो भी वे राजनीतिकी रक्षा कर रहे हैं। (नीतिकी मर्यादा रखनेके लिये सीताजीका पता लगानेको जहाँ-तहाँ वानरोंको भेज रहे हैं)॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 704 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जद्यपि प्रभु जानत सब बाता। राजनीति राखत सुरत्राता।।
English explanation
Although the Lord knows everything, Rama, protector of the gods, still observes the principles of statecraft.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| जानत | जानते हैं | knows |
| सब | सभी | all |
| बाता | बातें | matters |
| राजनीति | राजकार्य की नीति | principles of statecraft |
| राखत | पालन करते हैं | observes |
| सुरत्राता | देवताओं के रक्षक राम | Rama, protector of the gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 704
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 703, 704
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।