किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तजि माया सेइअ परलोका। मिटहिं सकल भव संभव सोका।।
मूल पाठ
तजि माया सेइअ परलोका। मिटहिं सकल भव संभव सोका।।
देह धरे कर यह फलु भाई। भजिअ राम सब काम बिहाई।।
स्रोत अभिलेख 4.23 · पुस्तक पृ. 703, 704
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाया (विषयोंकी ममता-आसक्ति) को छोड़कर परलोकका सेवन (भगवान्के दिव्य धामकी प्राप्तिके लिये भगवत्सेवारूप साधन) करना चाहिये, जिससे भव (जन्म-मरण) से उत्पन्न सारे शोक मिट जायँ। हे भाई! देह धारण करनेका यही फल है कि सब कामों (कामनाओं) को छोड़कर श्रीरामजीका भजन ही किया जाय॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 703 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तजि माया सेइअ परलोका। मिटहिं सकल भव संभव सोका।।
English explanation
Abandon attachment to worldly illusion and seek welfare in the life beyond; all sorrows arising from worldly existence then disappear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| माया | माया; सांसारिक मोह | worldly illusion and attachment |
| सेइअ | साधना चाहिए; हित करना चाहिए | one should pursue the welfare of |
| परलोका | परलोक; मृत्यु के बाद का जीवन | the life beyond death |
| मिटहिं | मिट जाते हैं | disappear |
| सकल | सभी | all |
| भव | संसार से | from worldly existence |
| संभव | उत्पन्न | arising |
| सोका | शोक; दुःख | sorrows |
2 देह धरे कर यह फलु भाई। भजिअ राम सब काम बिहाई।।
English explanation
Brother, this is the purpose of embodied life: to set aside all other pursuits and worship Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देह | शरीर | a body |
| धरे | धारण करने | having assumed |
| कर | का | of |
| यह | यही | this very |
| फलु | फल; सार्थक उपलब्धि | fruit; fulfillment |
| भाई | हे भाई | O brother |
| भजिअ | भजन करना चाहिए | one should worship |
| राम | श्रीराम का | Rama |
| सब | सभी | all |
| काम | अन्य काम; सांसारिक प्रयोजन | other pursuits; worldly concerns |
| बिहाई | छोड़कर | having set aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 703
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 703, 704
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।