किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन क्रम बचन सो जतन बिचारेहु। रामचंद्र कर काजु सँवारेहु।।
मूल पाठ
मन क्रम बचन सो जतन बिचारेहु। रामचंद्र कर काजु सँवारेहु।।
भानु पीठि सेइअ उर आगी। स्वामिहि सर्ब भाव छल त्यागी।।
स्रोत अभिलेख 4.23 · पुस्तक पृ. 703, 704
भावार्थ
मूल पाठ के बादमन, वचन तथा कर्मसे उसीका (सीताजीका पता लगानेका) उपाय सोचना। श्रीरामचन्द्रजीका कार्य सम्पन्न (सफल) करना। सूर्यको पीठसे और अग्रिको हृदयसे (सामनेसे) सेवन करना चाहिये। परन्तु स्वामीकी सेवा तो छल छोड़कर सर्वभावसे (मन, वचन, कर्मसे) करनी चाहिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 703 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मन क्रम बचन सो जतन बिचारेहु। रामचंद्र कर काजु सँवारेहु।।
English explanation
In thought, deed, and speech, consider the means of bringing Rama’s task to success.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| सो | उस; ऐसा | that; such |
| जतन | उपाय; प्रयत्न | means; effort |
| बिचारेहु | विचार करो | consider |
| रामचंद्र | श्रीराम | Rama |
| कर | का | of |
| काजु | कार्य | task |
| सँवारेहु | सफल करो; सँवारो | accomplish; bring to success |
2 भानु पीठि सेइअ उर आगी। स्वामिहि सर्ब भाव छल त्यागी।।
English explanation
Receive the sun’s warmth on your back and the fire’s warmth on your front; serve your master wholeheartedly, abandoning deceit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भानु | सूर्य | the sun |
| पीठि | पीठ की ओर से | with the back toward it |
| सेइअ | सेवन करना चाहिए; ताप लेना चाहिए | one should receive warmth |
| उर | छाती की ओर; सामने से | with the chest toward it; from the front |
| आगी | आग | fire |
| स्वामिहि | स्वामी की; स्वामी को | the master; to the master |
| सर्ब | सभी; संपूर्ण | all; complete |
| भाव | भाव से; मनोभाव से | with devotion and intention |
| छल | कपट | deceit |
| त्यागी | त्यागकर | having abandoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 703
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 703, 704
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।