किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर मिलेउ नाइ पद माथा। भैंटेउ अनुज सहित रघुनाथा।।
मूल पाठ
सादर मिलेउ नाइ पद माथा। भैंटेउ अनुज सहित रघुनाथा।।
कपि कर मन बिचार एहि रीती। करिहहिं बिधि मो सन ए प्रीती।।
स्रोत अभिलेख 4.4 · पुस्तक पृ. 685, 685
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुग्रीव चरणोंमें मस्तक नवाकर आदरसहित मिले। श्रीरघुनाथजी भी छोटे भाईसहित उनसे गले लगकर मिले। सुग्रीव मनमें इस प्रकार सोच रहे हैं कि हे विधाता! क्या ये मुझसे प्रीति करेंगे?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 685 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सादर मिलेउ नाइ पद माथा। भैंटेउ अनुज सहित रघुनाथा।।
English explanation
Sugriva respectfully greeted them, bowing his head at their feet; Rama, lord of Raghu’s lineage, together with his younger brother Lakshmana, embraced him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| मिलेउ | मिले | met, greeted |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| पद | चरणों में | at the feet |
| माथा | सिर | head |
| भैंटेउ | गले लगाया | embraced |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| सहित | साथ | together with |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 कपि कर मन बिचार एहि रीती। करिहहिं बिधि मो सन ए प्रीती।।
English explanation
Sugriva thought to himself: ‘O Providence, will they befriend me?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानरराज सुग्रीव | the monkey king Sugriva |
| कर | के | of |
| मन | मन में | in the mind |
| बिचार | विचार था | the thought was |
| एहि | इस | this |
| रीती | प्रकार | way |
| करिहहिं | क्या करेंगे | will they form |
| बिधि | हे विधाता | O Providence |
| मो | मेरे | me |
| सन | साथ | with |
| ए | ये राम और लक्ष्मण | these two, Rama and Lakshmana |
| प्रीती | मित्रता | friendship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 685
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 685
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।