किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 4 · दोहा/सोरठा
तब हनुमंत उभय दिसि की सब कथा सुनाइ।।
तब हनुमंत उभय दिसि की सब कथा सुनाइ।।
पावक साखी देइ करि जोरी प्रीती दृढ़ाइ।।4।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.4 · पुस्तक पृ. 685, 685
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तब हनुमंत उभय दिसि की सब कथा सुनाइ।।
तब हनुमान ने दोनों पक्षों का सारा वृत्तांत सुनाया।
English explanation
Then Hanuman related the complete accounts of both sides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हनुमंत | हनुमान ने | Hanuman |
| उभय | दोनों | both |
| दिसि | पक्षों | sides |
| की | की | of |
| सब | सारी | all |
| कथा | कथा, वृत्तांत | accounts |
| सुनाइ | सुनाया | related |
2 पावक साखी देइ करि जोरी प्रीती दृढ़ाइ।।4।।
हनुमान ने अग्नि को साक्षी बनाकर दोनों की मित्रता जोड़ दी और उसे दृढ़ किया।
English explanation
Taking fire as witness, Hanuman joined the two in friendship and made their bond firm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावक | अग्नि को | fire |
| साखी | साक्षी | witness |
| देइ | देकर, रखकर | setting as |
| करि | करके | having done so |
| जोरी | जोड़ दी | joined, established |
| प्रीती | मित्रता | friendship |
| दृढ़ाइ | दृढ़ की | made firm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 4
- स्रोत अभिलेख
- 4.4
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 685
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