किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लै सुग्रीव संग रघुनाथा। चले चाप सायक गहि हाथा।।
मूल पाठ
लै सुग्रीव संग रघुनाथा। चले चाप सायक गहि हाथा।।
तब रघुपति सुग्रीव पठावा। गर्जेसि जाइ निकट बल पावा।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
भावार्थ
मूल पाठ के बादतदनन्तर सुग्रीवको साथ लेकर और हाथोंमें धनुष-बाण धारण करके श्रीरघुनाथजी चले। तब श्रीरघुनाथजीने सुग्रीवको बालिके पास भेजा। वह श्रीरामजीका बल पाकर बालिके निकट जाकर गरजा॥ १३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 689 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लै सुग्रीव संग रघुनाथा। चले चाप सायक गहि हाथा।।
English explanation
Rama set out with Sugriva, holding bow and arrow in his hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लै | लेकर | taking |
| सुग्रीव | सुग्रीव को | Sugriva |
| संग | साथ | along |
| रघुनाथा | राम | Rama |
| चले | चले | set out |
| चाप | धनुष | bow |
| सायक | बाण | arrow |
| गहि | पकड़कर | holding |
| हाथा | हाथ में | in hand |
2 तब रघुपति सुग्रीव पठावा। गर्जेसि जाइ निकट बल पावा।।
English explanation
Then Rama sent Sugriva ahead. Drawing strength from Rama's support, Sugriva went near and roared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुपति | राम, रघुवंश के स्वामी | Rama, lord of Raghu's line |
| सुग्रीव | सुग्रीव को | Sugriva |
| पठावा | भेजा | sent |
| गर्जेसि | वे गर्जे | he roared |
| जाइ | जाकर | going |
| निकट | पास | near |
| बल | बल-सहारा | supporting strength |
| पावा | पाया | received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 689
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
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