किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बालि क्रोधातुर धावा। गहि कर चरन नारि समुझावा।।
मूल पाठ
सुनत बालि क्रोधातुर धावा। गहि कर चरन नारि समुझावा।।
सुनु पति जिन्हहि मिलेउ सुग्रीवा। ते द्वौ बंधु तेज बल सींवा।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
भावार्थ
मूल पाठ के बादबालि सुनते ही क्रोधमें भरकर वेगसे दौड़ा। उसकी स्त्री ताराने चरण पकड़कर उसे समझाया कि हे नाथ! सुनिये, सुग्रीव जिनसे मिले हैं वे दोनों भाई तेज और बलकी सीमा हैं॥ १४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 690 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनत बालि क्रोधातुर धावा। गहि कर चरन नारि समुझावा।।
English explanation
Hearing the roar, Bali rushed out in anger; his wife Tara grasped his hands and feet and tried to counsel him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बालि | बालि | Bali |
| क्रोधातुर | क्रोध से व्याकुल | overcome with anger |
| धावा | दौड़ा | rushed |
| गहि | पकड़कर | grasping |
| कर | हाथ | hands |
| चरन | चरण | feet |
| नारि | पत्नी तारा ने | his wife Tara |
| समुझावा | समझाया | counseled him |
2 सुनु पति जिन्हहि मिलेउ सुग्रीवा। ते द्वौ बंधु तेज बल सींवा।।
English explanation
‘Listen, husband: the two brothers whom Sugriva has met are the very height of prowess and strength.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| पति | हे पति | O husband |
| जिन्हहि | जिनसे | whom |
| मिलेउ | मिले हैं | has met |
| सुग्रीवा | सुग्रीव | Sugriva |
| ते | वे | they |
| द्वौ | दोनों | both |
| बंधु | भाई | brothers |
| तेज | तेज | prowess |
| बल | बल | strength |
| सींवा | की पराकाष्ठा | the utmost limit of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 690
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।