किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम कहा अनुजहि समुझाई। राज देहु सुग्रीवहि जाई।।
मूल पाठ
राम कहा अनुजहि समुझाई। राज देहु सुग्रीवहि जाई।।
रघुपति चरन नाइ करि माथा। चले सकल प्रेरित रघुनाथा।।
स्रोत अभिलेख 4.11 · पुस्तक पृ. 693, 694
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब श्रीरामचन्द्रजीने छोटे भाई लक्ष्मणको समझाकर कहा कि तुम जाकर सुग्रीवको राज्य दे दो। श्रीरघुनाथजीकी प्रेरणा (आज्ञा) से सब लोग श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें मस्तक नवाकर चले॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 693 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम कहा अनुजहि समुझाई। राज देहु सुग्रीवहि जाई।।
English explanation
Rama instructed his younger brother Lakshmana: ‘Go and grant Sugriva the kingship.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| कहा | कहा | said |
| अनुजहि | छोटे भाई लक्ष्मण को | to his younger brother Lakshmana |
| समुझाई | समझाकर | instructing |
| राज | राज्य | the kingship |
| देहु | दो | grant |
| सुग्रीवहि | सुग्रीव को | to Sugriva |
| जाई | जाकर | having gone |
2 रघुपति चरन नाइ करि माथा। चले सकल प्रेरित रघुनाथा।।
English explanation
Bowing their heads at Rama’s feet, they all set out at his direction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| करि | करके | having done so |
| माथा | सिर | their heads |
| चले | चल पड़े | set out |
| सकल | सभी | all |
| प्रेरित | आज्ञा से प्रेरित | directed by |
| रघुनाथा | राम की | Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 693
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 693, 694
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।