किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुढ़ तोहि अतिसय अभिमाना। नारि सिखावन करसि न काना।।
मूल पाठ
मुढ़ तोहि अतिसय अभिमाना। नारि सिखावन करसि न काना।।
मम भुज बल आश्रित तेहि जानी। मारा चहसि अधम अभिमानी।।
स्रोत अभिलेख 4.9 · पुस्तक पृ. 691, 691
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मूढ़! तुझे अत्यन्त अभिमान है। तूने अपनी स्त्रीकी सीखपर भी कान (ध्यान) नहीं दिया। सुग्रीवको मेरी भुजाओंके बलका आश्रित जानकर भी अरे अधम अभिमानी! तूने उसको मारना चाहा!॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 691 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मुढ़ तोहि अतिसय अभिमाना। नारि सिखावन करसि न काना।।
English explanation
Fool, you are exceedingly proud; you pay no heed to your wife’s counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुढ़ | हे मूर्ख | O fool |
| तोहि | तुझे | to you |
| अतिसय | अत्यधिक | excessive |
| अभिमाना | अभिमान | pride |
| नारि | पत्नी तारा की | of your wife Tara |
| सिखावन | सीख | counsel |
| करसि | तू देता है | you give |
| न | नहीं | not |
| काना | कान; ध्यान | ear; heed |
2 मम भुज बल आश्रित तेहि जानी। मारा चहसि अधम अभिमानी।।
English explanation
You base, arrogant one! Even knowing that Sugriva relies on the strength of my arms, you seek to kill him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरी | my |
| भुज | भुजाओं का | of the arms |
| बल | बल | strength |
| आश्रित | आश्रय लेने वाला | relying on |
| तेहि | उसे, सुग्रीव को | him, Sugriva |
| जानी | जानकर | knowing |
| मारा | मारना | to kill |
| चहसि | तू चाहता है | you wish |
| अधम | हे नीच | O base one |
| अभिमानी | अभिमानी | arrogant one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 691
- सहायक विषय
- बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 691, 691
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।