किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 9 · दोहा/सोरठा
सुनहु राम स्वामी सन चल न चातुरी मोरि।
सुनहु राम स्वामी सन चल न चातुरी मोरि।
प्रभु अजहूँ मैं पापी अंतकाल गति तोरि।।9।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.9 · पुस्तक पृ. 691, 691
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनहु राम स्वामी सन चल न चातुरी मोरि।
बालि बोला: सुनिए राम, मेरे स्वामी के सामने मेरी चतुराई नहीं चल सकती।
English explanation
Bali said: Listen, Rama; my cleverness cannot prevail with you, my master.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| राम | हे राम | O Rama |
| स्वामी | स्वामी | master |
| सन | के साथ; के सामने | with; before |
| चल | चल सकती | can prevail |
| न | नहीं | not |
| चातुरी | चतुराई | cleverness |
| मोरि | मेरी | my |
2 प्रभु अजहूँ मैं पापी अंतकाल गति तोरि।।9।।
हे प्रभु, क्या अंतकाल में आपका आश्रय पाकर भी मैं अब तक पापी हूँ?
English explanation
Lord, am I still a sinner even though, at the hour of death, you are my refuge?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| अजहूँ | अब भी | even now |
| मैं | मैं | I |
| पापी | पापी | a sinner |
| अंतकाल | मृत्यु के समय | at the hour of death |
| गति | आश्रय | refuge |
| तोरि | आपका | yours |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 9
- स्रोत अभिलेख
- 4.9
- सहायक विषय
- बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 691, 691
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।