किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।।
मूल पाठ
अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।।
इन्हहि कुद्दष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई।।
स्रोत अभिलेख 4.9 · पुस्तक पृ. 691, 691
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[श्रीरामजीने कहा—] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाईकी स्त्री, बहिन, पुत्रकी स्त्री और कन्या—ये चारों समान हैं। इनको जो कोई बुरी दृष्टिसे देखता है, उसे मारनेमें कुछ भी पाप नहीं होता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 691 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।।
English explanation
Rama said: Listen, fool! A younger brother’s wife, a sister, and a son’s wife—these, together with one’s daughter, are the four to be regarded as daughters.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई की | younger brother’s |
| बधू | पत्नी | wife |
| भगिनी | बहन | sister |
| सुत | पुत्र की | son’s |
| नारी | पत्नी | wife |
| सुनु | सुन | listen |
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| कन्या | पुत्री | daughter |
| सम | के समान | like |
| ए | ये | these |
| चारी | चारों | all four |
2 इन्हहि कुद्दष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई।।
English explanation
Whoever looks upon these women with a lustful gaze—no sin is incurred by killing him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इन्हहि | इन्हें | these women |
| कुद्दष्टि | बुरी, कामुक दृष्टि से | with a lustful gaze |
| बिलोकइ | देखता है | looks upon |
| जोई | जो कोई | whoever |
| ताहि | उसे | him |
| बधें | मारने पर | upon killing |
| कछु | कोई | any |
| पाप | पाप | sin |
| न | नहीं | not |
| होई | होता | occurs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 691
- सहायक विषय
- बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 691, 691
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।