किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मास दिवस तहँ रहेउँ खरारी। निसरी रुधिर धार तहँ भारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे खरारि! मैं वहाँ महीनेभरतक रहा। वहाँ (उस गुफामेंसे) रक्तकी बड़ी भारी धारा निकली। तब [मैंने समझा कि] उसने बालिको मार डाला, अब आकर मुझे मारेगा। इसलिये मैं वहाँ (गुफाके द्वारपर) एक शिला लगाकर भाग आया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 687 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मास दिवस तहँ रहेउँ खरारी। निसरी रुधिर धार तहँ भारी।।
बालि हतेसि मोहि मारिहि आई। सिला देइ तहँ चलेउँ पराई।।
स्रोत अभिलेख 4.6 · पुस्तक पृ. 686, 687
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मास दिवस तहँ रहेउँ खरारी। निसरी रुधिर धार तहँ भारी।।
English explanation
O Rama, foe of Khara, I stayed there for a month. A great stream of blood then flowed out from there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मास | महीना | a month |
| दिवस | भर की अवधि | a span of days |
| तहँ | वहाँ | there |
| रहेउँ | मैं रहा | I stayed |
| खरारी | हे खर के शत्रु राम | O Rama, enemy of Khara |
| निसरी | बाहर निकली | flowed out |
| रुधिर | रक्त की | of blood |
| धार | धारा | stream |
| तहँ | वहाँ से | from there |
| भारी | बड़ी | great |
2 बालि हतेसि मोहि मारिहि आई। सिला देइ तहँ चलेउँ पराई।।
English explanation
I thought Mayavi had killed Bali and would come and kill me. I placed a rock there and fled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालि | बालि को | Bali |
| हतेसि | उसने मार डाला | he has killed |
| मोहि | मुझे | me |
| मारिहि | मारेगा | will kill |
| आई | आकर | coming here |
| सिला | शिला | a rock |
| देइ | रखकर | placing |
| तहँ | वहाँ | there |
| चलेउँ | मैं चला गया | I went away |
| पराई | भागकर | fleeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 687
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 686, 687
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।