किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंत्रिन्ह पुर देखा बिनु साईं। दीन्हेउ मोहि राज बरिआई।।
मूल पाठ
मंत्रिन्ह पुर देखा बिनु साईं। दीन्हेउ मोहि राज बरिआई।।
बालि ताहि मारि गृह आवा। देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा।।
स्रोत अभिलेख 4.6 · पुस्तक पृ. 686, 687
भावार्थ
मूल पाठ के बादमन्त्रियोंने नगरको बिना स्वामी (राजा) का देखा, तो मुझको जबर्दस्ती राज्य दे दिया। बालि उसे मारकर घर आ गया। मुझे [राजसिंहासनपर] देखकर उसने जीमें भेद बढ़ाया (बहुत ही विरोध माना)। [उसने समझा कि यह राज्यके लोभसे ही गुफाके द्वारपर शिला दे आया था, जिससे मैं बाहर न निकल सकूँ; और यहाँ आकर राजा बन बैठा]॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 687 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मंत्रिन्ह पुर देखा बिनु साईं। दीन्हेउ मोहि राज बरिआई।।
English explanation
The ministers saw the town without its ruler and pressed the kingship upon me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंत्रिन्ह | मंत्रियों ने | the ministers |
| पुर | नगर को | the town |
| देखा | देखा | saw |
| बिनु | बिना | without |
| साईं | स्वामी के | its ruler |
| दीन्हेउ | दे दिया | gave |
| मोहि | मुझे | me |
| राज | राज्याधिकार | the kingship |
| बरिआई | जबरन आग्रह करके | by pressing it upon me |
2 बालि ताहि मारि गृह आवा। देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा।।
English explanation
Bali returned home after killing Mayavi. Seeing me, hostility grew in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालि | बालि | Bali |
| ताहि | उस मायावी को | him, Mayavi |
| मारि | मारकर | having killed |
| गृह | घर | home |
| आवा | लौटे | returned |
| देखि | देखकर | seeing |
| मोहि | मुझे | me |
| जियँ | मन में | in his heart |
| भेद | वैरभाव | hostility |
| बढ़ावा | बढ़ाया | increased |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 687
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 686, 687
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।