किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिपु सम मोहि मारेसि अति भारी। हरि लीन्हेसि सर्बसु अरु नारी।।
मूल पाठ
रिपु सम मोहि मारेसि अति भारी। हरि लीन्हेसि सर्बसु अरु नारी।।
ताकें भय रघुबीर कृपाला। सकल भुवन मैं फिरेउँ बिहाला।।
स्रोत अभिलेख 4.6 · पुस्तक पृ. 686, 687
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसने मुझे शत्रुके समान बहुत अधिक मारा और मेरा सर्वस्व तथा मेरी स्त्रीको भी छीन लिया। हे कृपालु रघुवीर! मैं उसके भयसे समस्त लोकोंमें बेहाल होकर फिरता रहा॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 687 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रिपु सम मोहि मारेसि अति भारी। हरि लीन्हेसि सर्बसु अरु नारी।।
English explanation
He beat me severely as though I were an enemy and took away all my possessions and my wife.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रु के | an enemy |
| सम | समान | like |
| मोहि | मुझे | me |
| मारेसि | उसने पीटा | he beat |
| अति | बहुत | very |
| भारी | बुरी तरह | severely |
| हरि | छीन | taking away |
| लीन्हेसि | उसने लिया | he took |
| सर्बसु | सर्वस्व | all my possessions |
| अरु | और | and |
| नारी | पत्नी | my wife |
2 ताकें भय रघुबीर कृपाला। सकल भुवन मैं फिरेउँ बिहाला।।
English explanation
O compassionate Rama, hero of Raghu’s line, I wandered distraught throughout the world in fear of him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताकें | उसके | of him |
| भय | भय से | from fear |
| रघुबीर | हे रघुकुल के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s line |
| कृपाला | हे कृपालु | O compassionate one |
| सकल | समस्त | all |
| भुवन | संसार में | throughout the world |
| मैं | मैं | I |
| फिरेउँ | भटकता रहा | wandered |
| बिहाला | व्याकुल | distraught |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 687
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 686, 687
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।