किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बालि परम हित जासु प्रसादा। मिलेहु राम तुम्ह समन बिषादा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे श्रीरामजी! बालि तो मेरा परम हितकारी है, जिसकी कृपासे शोकका नाश करनेवाले आप मुझे मिले; और जिसके साथ अब स्वप्रमें भी लड़ाई हो तो जागनेपर उसे समझकर मनमें संकोच होगा [कि स्वप्रमें भी मैं उससे क्यों लड़ा]॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 689 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बालि परम हित जासु प्रसादा। मिलेहु राम तुम्ह समन बिषादा।।
सपनें जेहि सन होइ लराई। जागें समुझत मन सकुचाई।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बालि परम हित जासु प्रसादा। मिलेहु राम तुम्ह समन बिषादा।।
English explanation
Bali is my greatest benefactor, for through him I met you, Rama, the dispeller of sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालि | बालि | Bali |
| परम | परम | greatest |
| हित | हितकारी | benefactor |
| जासु | जिसके | whose |
| प्रसादा | अनुग्रह से | through favor |
| मिलेहु | मुझे मिले | you met me |
| राम | हे राम | O Rama |
| तुम्ह | आप | you |
| समन | मिटाने वाले | dispeller of |
| बिषादा | विषाद | sorrow |
2 सपनें जेहि सन होइ लराई। जागें समुझत मन सकुचाई।।
English explanation
When one fights someone in a dream, the mind feels abashed on waking and recognizing what happened.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सपनें | सपने में | in a dream |
| जेहि | जिससे | whomever |
| सन | के साथ | with |
| होइ | होती है | occurs |
| लराई | लड़ाई | a fight |
| जागें | जागने पर | on waking |
| समुझत | समझते हुए | on realizing |
| मन | मन | the mind |
| सकुचाई | संकोच करता है | feels abashed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 689
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।