किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ए सब रामभगति के बाधक। कहहिं संत तब पद अवराधक।।
मूल पाठ
ए सब रामभगति के बाधक। कहहिं संत तब पद अवराधक।।
सत्रु मित्र सुख दुख जग माहीं। माया कृत परमारथ नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
भावार्थ
मूल पाठ के बादक्योंकि आपके चरणोंकी आराधना करनेवाले संत कहते हैं कि ये सब (सुख-सम्पत्ति आदि) रामभक्तिके विरोधी हैं। जगत्में जितने भी शत्रु-मित्र और सुख-दु:ख [आदि द्वन्द्व] हैं, सब-के- सब मायारचित हैं, परमार्थत: (वास्तवमें ) नहीं हैं॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 689 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ए सब रामभगति के बाधक। कहहिं संत तब पद अवराधक।।
English explanation
Saints who worship your feet say that all these obstruct devotion to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये | these |
| सब | सब | all |
| रामभगति | राम की भक्ति | devotion to Rama |
| के | के | of |
| बाधक | बाधा डालने वाले | obstacles |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| संत | संत | saints |
| तब | आपके | your |
| पद | चरणों के | of the feet |
| अवराधक | आराधक | worshippers |
2 सत्रु मित्र सुख दुख जग माहीं। माया कृत परमारथ नाहीं।।
English explanation
Enemies, friends, pleasure, and sorrow in the world are products of maya, not ultimate reality.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्रु | शत्रु | enemies |
| मित्र | मित्र | friends |
| सुख | सुख | pleasure |
| दुख | दुख | sorrow |
| जग | जगत | the world |
| माहीं | में | in |
| माया | माया द्वारा | by maya |
| कृत | निर्मित | produced |
| परमारथ | परम सत्य | ultimate reality |
| नाहीं | नहीं हैं | are not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 689
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।