किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उपजा ग्यान बचन तब बोला। नाथ कृपाँ मन भयउ अलोला।।
मूल पाठ
उपजा ग्यान बचन तब बोला। नाथ कृपाँ मन भयउ अलोला।।
सुख संपति परिवार बड़ाई। सब परिहरि करिहउँ सेवकाई।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब ज्ञान उत्पन्न हुआ तब वे ये वचन बोले कि हे नाथ! आपकी कृपासे अब मेरा मन स्थिर हो गया। सुख, सम्पत्ति, परिवार और बड़ाई (बड़प्पन) सबको त्यागकर मैं आपकी सेवा ही करूँगा॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 689 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 उपजा ग्यान बचन तब बोला। नाथ कृपाँ मन भयउ अलोला।।
English explanation
Understanding arose; then Sugriva said, ‘Lord, through your grace my mind has become steady.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| ग्यान | ज्ञान | understanding |
| बचन | वचन | words |
| तब | तब | then |
| बोला | बोले | spoke |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| कृपाँ | आपकी कृपा से | through your grace |
| मन | मन | mind |
| भयउ | हो गया | has become |
| अलोला | अचंचल | steady |
2 सुख संपति परिवार बड़ाई। सब परिहरि करिहउँ सेवकाई।।
English explanation
Giving up pleasure, wealth, family, and prestige, I will serve you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख | pleasure |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| परिवार | परिवार | family |
| बड़ाई | प्रतिष्ठा | prestige |
| सब | सब | all |
| परिहरि | त्यागकर | giving up |
| करिहउँ | मैं करूँगा | I will perform |
| सेवकाई | आपकी सेवा | service to you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 689
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।