किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि अमित बल बाढ़ी प्रीती। बालि बधब इन्ह भइ परतीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीका अपरिमित बल देखकर सुग्रीवकी प्रीति बढ़ गयी और उन्हें विश्वास हो गया कि ये बालिका वध अवश्य करेंगे। वे बार-बार चरणोंमें सिर नवाने लगे। प्रभुको पहचानकर सुग्रीव मनमें हॢषत हो रहे थे॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 688 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि अमित बल बाढ़ी प्रीती। बालि बधब इन्ह भइ परतीती।।
बार बार नावइ पद सीसा। प्रभुहि जानि मन हरष कपीसा।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि अमित बल बाढ़ी प्रीती। बालि बधब इन्ह भइ परतीती।।
English explanation
Seeing Rama's boundless strength, Sugriva's affection grew, and he became convinced that Rama would kill Bali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| अमित | असीम | boundless |
| बल | बल | strength |
| बाढ़ी | बढ़ी | grew |
| प्रीती | प्रीति | affection |
| बालि | बालि को | Bali |
| बधब | मारेंगे | will kill |
| इन्ह | ये राम | he, Rama |
| भइ | हुई | arose |
| परतीती | दृढ़ विश्वास | conviction |
2 बार बार नावइ पद सीसा। प्रभुहि जानि मन हरष कपीसा।।
English explanation
Sugriva repeatedly bows his head at Rama's feet; recognizing him as the Lord, the monkey king rejoices inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| नावइ | झुकाते हैं | bows |
| पद | चरणों पर | at the feet |
| सीसा | सिर | head |
| प्रभुहि | प्रभु को | the Lord |
| जानि | पहचानकर | recognizing |
| मन | मन में | inwardly |
| हरष | हर्षित हुए | rejoiced |
| कपीसा | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, king of monkeys |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 688
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।