किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँती। सब तजि भजनु करौं दिन राती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे प्रभो! अब तो इस प्रकार कृपा कीजिये कि सब छोड़कर दिन-रात मैं आपका भजन ही करूँ। सुग्रीवकी वैराग्ययुक्त वाणी सुनकर (उसके क्षणिक वैराग्यको देखकर) हाथमें धनुष धारण करनेवाले श्रीरामजी मुसकराकर बोले—॥ ११॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 689 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँती। सब तजि भजनु करौं दिन राती।।
सुनि बिराग संजुत कपि बानी। बोले बिहँसि रामु धनुपानी।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँती। सब तजि भजनु करौं दिन राती।।
English explanation
Now, Lord, grant me such grace that, abandoning everything, I may worship you day and night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| कृपा | कृपा | grace |
| करहु | कीजिए | bestow |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | way |
| सब | सब | everything |
| तजि | त्यागकर | abandoning |
| भजनु | भजन | devotional worship |
| करौं | मैं करूँ | I may perform |
| दिन | दिन | day |
| राती | रात | night |
2 सुनि बिराग संजुत कपि बानी। बोले बिहँसि रामु धनुपानी।।
English explanation
Hearing Sugriva's words filled with detachment, Rama, bow in hand, smiled and spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| बिराग | वैराग्य | detachment |
| संजुत | से युक्त | filled with |
| कपि | वानर सुग्रीव की | of Sugriva, the monkey |
| बानी | वाणी | speech |
| बोले | बोले | spoke |
| बिहँसि | मुस्कराकर | smiling |
| रामु | राम | Rama |
| धनुपानी | हाथ में धनुष धारण करने वाले | holding a bow in hand |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 689
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
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