किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव माया बस फिरउँ भुलाना। ता ते मैं नहिं प्रभु पहिचाना।।
मूल पाठ
तव माया बस फिरउँ भुलाना। ता ते मैं नहिं प्रभु पहिचाना।।
स्रोत अभिलेख 4.2 · पुस्तक पृ. 683, 684
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं तो आपकी मायाके वश भूला फिरता हूँ; इसीसे मैंने अपने स्वामी (आप) को नहीं पहचाना॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 684 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तव माया बस फिरउँ भुलाना। ता ते मैं नहिं प्रभु पहिचाना।।
English explanation
Under the sway of your maya, I wander in bewilderment; that is why, Lord, I did not recognize you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपकी | your |
| माया | माया, मोहकारी शक्ति | maya, deluding power |
| बस | के अधीन | under the sway of |
| फिरउँ | मैं भटकता हूँ | I wander |
| भुलाना | भूला हुआ | bewildered |
| ता | उस | that |
| ते | के कारण | because of |
| मैं | मैंने | I |
| नहिं | नहीं | did not |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| पहिचाना | आपको पहचाना | recognize you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 684
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 683, 684
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।