किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब रघुपति बोले मुसकाई। तुम्ह प्रिय मोहि भरत जिमि भाई।।
मूल पाठ
तब रघुपति बोले मुसकाई। तुम्ह प्रिय मोहि भरत जिमि भाई।।
अब सोइ जतनु करहु मन लाई। जेहि बिधि सीता कै सुधि पाई।।
स्रोत अभिलेख 4.21 · पुस्तक पृ. 701, 702
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब श्रीरघुनाथजी मुसकराकर बोले—हे भाई! तुम मुझे भरतके समान प्यारे हो। अब मन लगाकर वही उपाय करो जिस उपायसे सीताकी खबर मिले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 702 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब रघुपति बोले मुसकाई। तुम्ह प्रिय मोहि भरत जिमि भाई।।
English explanation
Then Rama smiled and said, ‘You are as dear to me as my brother Bharata.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| बोले | बोले | said |
| मुसकाई | मुसकराकर | with a smile |
| तुम्ह | तुम | you |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोहि | मुझे | to me |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| जिमि | जैसे | as |
| भाई | भाई | brother |
2 अब सोइ जतनु करहु मन लाई। जेहि बिधि सीता कै सुधि पाई।।
English explanation
Now devote yourself to the effort by which news of Sita may be obtained.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सोइ | वही | that very |
| जतनु | प्रयत्न | effort |
| करहु | करो | make |
| मन | मन | mind |
| लाई | लगाकर | applying |
| जेहि | जिस | by which |
| बिधि | विधि से | means |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| कै | का | of |
| सुधि | समाचार; पता | news; whereabouts |
| पाई | मिल सके | may be obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 702
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 702
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।