किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोभ पाँस जेहिं गर न बँधाया। सो नर तुम्ह समान रघुराया।।
मूल पाठ
लोभ पाँस जेहिं गर न बँधाया। सो नर तुम्ह समान रघुराया।।
यह गुन साधन तें नहिं होई। तुम्हरी कृपाँ पाव कोइ कोई।।
स्रोत अभिलेख 4.21 · पुस्तक पृ. 701, 702
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर लोभकी फाँसीसे जिसने अपना गला नहीं बँधाया, हे रघुनाथजी! वह मनुष्य आपहीके समान है। ये गुण साधनसे नहीं प्राप्त होते। आपकी कृपासे ही कोई-कोई इन्हें पाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 702 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लोभ पाँस जेहिं गर न बँधाया। सो नर तुम्ह समान रघुराया।।
English explanation
And one who has not let his neck be caught in greed’s noose—that person, O king of Raghu’s line, is like you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोभ | लोभ का | greed’s |
| पाँस | फंदा | noose |
| जेहिं | जिसने | who |
| गर | गला | neck |
| न | नहीं | not |
| बँधाया | बँधने दिया | allowed to be bound |
| सो | वह | that |
| नर | मनुष्य | person |
| तुम्ह | आपके | you |
| समान | समान | like |
| रघुराया | हे रघुकुल के राजा राम | O Rama, king of Raghu’s line |
2 यह गुन साधन तें नहिं होई। तुम्हरी कृपाँ पाव कोइ कोई।।
English explanation
This virtue is not attained through spiritual practices; only a rare person gains it through your grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| गुन | गुण; विकारों से मुक्त रहने का गुण | virtue of remaining free from these passions |
| साधन | साधना के उपायों | spiritual practices |
| तें | से | through |
| नहिं | नहीं | not |
| होई | प्राप्त होता | is attained |
| तुम्हरी | आपकी | your |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| पाव | पाता है | attains |
| कोइ | कोई | some person |
| कोई | विरला ही | only a rare one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 702
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 702
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।