किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिषय बस्य सुर नर मुनि स्वामी। मैं पावँर पसु कपि अति कामी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे स्वामी! देवता, मनुष्य और मुनि सभी विषयोंके वशमें हैं। फिर मैं तो पामर पशु और पशुओंमें भी अत्यन्त कामी बंदर हूँ। स्त्रीका नयन-बाण जिसको नहीं लगा, जो भयङ्कर क्रोधरूपी अँधेरी रातमें भी जागता रहता है (क्रोधान्ध नहीं होता)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 702 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिषय बस्य सुर नर मुनि स्वामी। मैं पावँर पसु कपि अति कामी।।
नारि नयन सर जाहि न लागा। घोर क्रोध तम निसि जो जागा।।
स्रोत अभिलेख 4.21 · पुस्तक पृ. 701, 702
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिषय बस्य सुर नर मुनि स्वामी। मैं पावँर पसु कपि अति कामी।।
English explanation
Master, even gods, humans, and sages are subject to sensory pleasures; I am a lowly, animal-like monkey, deeply driven by desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषय | इंद्रिय-विषयों के | to sensory pleasures |
| बस्य | वश में | subject |
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| मुनि | मुनि | sages |
| स्वामी | हे स्वामी | O Master |
| मैं | मैं | I |
| पावँर | नीच; अधम | lowly; base |
| पसु | पशु | animal |
| कपि | वानर | monkey |
| अति | अत्यंत | extremely |
| कामी | कामनाओं के अधीन | driven by desire |
2 नारि नयन सर जाहि न लागा। घोर क्रोध तम निसि जो जागा।।
English explanation
One whom the arrows of a woman’s eyes have not struck, and who remains awake through the terribly dark night of anger—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारि | स्त्री के | a woman’s |
| नयन | नेत्रों के | eyes’ |
| सर | बाण | arrows |
| जाहि | जिसे | whom |
| न | नहीं | not |
| लागा | लगे | struck |
| घोर | भयंकर; घोर | terrible; intense |
| क्रोध | क्रोध रूपी | of anger |
| तम | अंधकार | darkness |
| निसि | रात में | in the night |
| जो | जो | who |
| जागा | जागता रहा | remained awake |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 702
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 702
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।