किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाइ चरन सिरु कह कर जोरी। नाथ मोहि कछु नाहिन खोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजीके चरणोंमें सिर नवाकर हाथ जोड़कर सुग्रीवने कहा—हे नाथ! मुझे कुछ भी दोष नहीं है। हे देव! आपकी माया अत्यन्त ही प्रबल है। आप जब दया करते हैं, हे राम! तभी यह छूटती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 701 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाइ चरन सिरु कह कर जोरी। नाथ मोहि कछु नाहिन खोरी।।
अतिसय प्रबल देव तब माया। छूटइ राम करहु जौं दाया।।
स्रोत अभिलेख 4.21 · पुस्तक पृ. 701, 702
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाइ चरन सिरु कह कर जोरी। नाथ मोहि कछु नाहिन खोरी।।
English explanation
AI-draft meaning: Bowing his head at the Lord’s feet and joining his hands, he says, ‘Lord, I am not at fault.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| कह | कहता है | says |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| नाथ | हे नाथ | O Lord |
| मोहि | मुझमें; मेरा | in me; mine |
| कछु | कुछ भी | any |
| नाहिन | नहीं है | there is not |
| खोरी | दोष | fault |
2 अतिसय प्रबल देव तब माया। छूटइ राम करहु जौं दाया।।
English explanation
O Lord, your illusion is exceedingly powerful; O Rama, one can escape it if you show mercy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतिसय | अत्यंत | exceedingly |
| प्रबल | बलवान | powerful |
| देव | हे देव | O Lord |
| तब | आपकी | your |
| माया | माया; मोह में डालने वाली शक्ति | illusion; deluding power |
| छूटइ | छुटकारा मिले | one may be freed |
| राम | हे राम | O Rama |
| करहु | आप करें | you grant |
| जौं | यदि | if |
| दाया | दया | mercy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 701
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 702
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।