किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानहिं यह चरित्र मुनि ग्यानी। जिन्ह रघुबीर चरन रति मानी।।
मूल पाठ
जानहिं यह चरित्र मुनि ग्यानी। जिन्ह रघुबीर चरन रति मानी।।
लछिमन क्रोधवंत प्रभु जाना। धनुष चढ़ाइ गहे कर बाना।।
स्रोत अभिलेख 4.18 · पुस्तक पृ. 699, 700
भावार्थ
मूल पाठ के बादज्ञानी मुनि जिन्होंने श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें प्रीति मान ली है (जोड़ ली है), वे ही इस चरित्र (लीलारहस्य) को जानते हैं। लक्ष्मणजीने जब प्रभुको क्रोधयुक्त जाना, तब उन्होंने धनुष चढ़ाकर बाण हाथमें ले लिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 700 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जानहिं यह चरित्र मुनि ग्यानी। जिन्ह रघुबीर चरन रति मानी।।
English explanation
This conduct is understood by wise sages who have embraced love for Rama's feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानहिं | जानते, समझते हैं | know, understand |
| यह | यह | this |
| चरित्र | आचरण, चरित्र | conduct |
| मुनि | मुनि | sages |
| ग्यानी | ज्ञानवान | wise |
| जिन्ह | जिन्होंने | who |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu's lineage |
| चरन | चरणों में | for his feet |
| रति | प्रेम, भक्ति | love, devotion |
| मानी | धारण की | have embraced |
2 लछिमन क्रोधवंत प्रभु जाना। धनुष चढ़ाइ गहे कर बाना।।
English explanation
Lakshmana perceived the Lord to be angry; he strung his bow and took arrows in his hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama's younger brother |
| क्रोधवंत | क्रोध से युक्त | angry |
| प्रभु | प्रभु राम को | the Lord Rama |
| जाना | समझा, जाना | perceived, understood |
| धनुष | धनुष | bow |
| चढ़ाइ | प्रत्यंचा चढ़ाकर | having strung |
| गहे | पकड़े, लिए | took, grasped |
| कर | हाथ में | in his hand |
| बाना | बाण | arrows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 700
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 699, 700
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।